कविता · Reading time: 1 minute

मैं तो तुलसी दास नहीं,मुर्दे पर बैठ आऊं

आ जाओ पिया पावस में, तुम्हारी याद सताती है
रिमझिम रिमझिम बदरा बरसैं, चैन मुझे न आती है
बाड़ आई, नदिया में सजनी, मैं कैंसे आ जाऊं
मैं तो तुलसी दास नहीं, मुर्दे पर बैठ आऊं
प्रेम प्रीत का गया जमाना,काया हुई पुरानी
पहले जैंसी बात नहीं, अब न दौड़ लगानी
फिर भी तुमको चैन न आए,कूद पड़ो नदिया में
ढेर बचाने आ जायेंगे,देख तुम्हें अंगिया में
पहले तो तुम मेरे ऊपर, कितना मरते थे
आसमान से चांद सितारे, यूं ही तोड़ा करते थे
पहले थीं तुम चंद्रमुखी,अब सूर्यमुखी सी लगती हो
बात बात पर गुर्राती,भूखी शेरनी लगती हो
राम करे नदिया न उतरे, तुम मुझे पुकारा करना
पहले जैंसी प्रीत पिया, तुम यूंही आंहें भरना
रहते रहते पास पिया,कदर न मेरी जानी
आज गया परदेश पिया,कीमत मेरी पहचानी
लड़ना भी है प्रेम पिया, ये जनम जनम का रिश्ता है
जाना नहीं अब दूर पिया, तुम बिन जी नहीं लगता है

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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