मैं तुमसे मिलके ऐसा हो गया हूँ

मैं तुम से मिलके ऐसा हो गया हूँ
हज़ारों में भी तन्हा हो गया हूँ

न कोई कारवां ना हम सफ़र है
मुसाफ़िर हूँ अकेला हो गया हूँ

मेरी तस्वीर का अब क्या करोगे
तुम्हारा ही मैं चेहरा हो गया हूँ

मेरे दिलकी ये धड़कन कह रही है
मुहब्बत में किसी का हो गया हूँ

बुलंदी आसमाँ की छूते – छूते
ख़ुद अपने क़द से छोटा हो गया हूँ

चमन से आपकी महफ़िल मेंआकर
मैं जुगनूं था सितारा हो गया हूँ

जहाँ में आज “आसी” ज़िन्दगी से
मुहब्बत कर के रूसवा हो गया हूँ
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आसी यूसुफपुरी

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