*मैं तुझे फिर मिलूंगी*

पता नहीं कब कैसे कहाँ मिलूंगी !
मगर मैं तुझे कहीं तो फिर मिलूंगी !!

बारिश की पहली बूँद में मिलूंगी !
या हवा के शीतल झोंके में मिलूंगी !!
पता नहीं कब कैसे कहाँ मिलूंगी !
मग़र मैं तुझे कहीं तो फिर मिलूंगी !!

चाँद की पिघलती चांदनी में मिलूंगी !
या अंधेरों में छुपे अहसास में मिलूंगी !!
पता नहीं कब कैसे कहाँ मिलूंगी !
मग़र मैं तुझे कहीं तो फिर मिलूंगी !!

धड़कते दिल की धड़कन में मिलूंगी !
या महकती तुम्हारी खुशबु में मिलूंगी !!
पता नहीं कब कैसे कहाँ मिलूंगी !
मग़र मैं तुझे कहीं तो फिर मिलूंगी !!

हो सके तो तलाश लेना ख़ुद में !
मैं वहीं कहीं तुझे ग़ुम मिलूंगी !!
पता नहीं कब कैसे कहाँ मिलूंगी !
मगर मैं तुझे कहीं तो फिर मिलूंगी !!

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*Writer* & *Wellness Coach* ---------------------------------------------------- मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी...
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