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मैं छोटा सही मुझको आता बहुत है

मैं छोटा सही मुझ को आता बहुत है
कि जीने का मुझको सलीक़ा बहुत है
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न सोचा न देखा न समझा बहुत है
जमाने तुझे हमने परखा –बहुत है
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मिलें चाँद सूरज ये खाहिश नही की
मुक़ददर का अपने सितारा बहुत है
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इसे क्या उसे क्या इन्हें क्या उन्हें क्या
ज़माने ने हमको भी लूटा बहुत है
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यक़ीं हम ज़माने पे करते भी कैसे
भरोसा है कम और धोका बहुत है
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अभी मुझसे आँखें वो फेरेंगे कैसे
अभी जेब में मेरी पैसा बहुत है

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Salib Chandiyanvi
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मेरा नाम मुहम्मद आरिफ़ ख़ां हैं मैं जिला बुलन्दशहर के ग्राम चन्दियाना का रहने वाला... View full profile
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