गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मैं गिरा इतना नहीं हूँ……..

मैं गिरा इतना नहीं हूँ…….
// दिनेश एल० “जैहिंद”

2122 2122 2122 22

आज का वादा हुआ है _ मैं ना कल जाऊँगा ।
मैं भी क्या वादा तुम्हारा हूँ कि टल जाऊँगा ।।

रंग गिरगिट की तरह मौसम बदलता होगा,,
मैं गिरा इतना नहीं हूँ _ यों बदल जाऊँगा ।।

मैं तो हूँ _ अपने इरादों का _ खिलाड़ी पक्का,,
मैं ना इतना तेल-सा चिकना फिसल जाऊँगा ।।

छोड़ दे _ ये जालिम जमाना_मुझे फुसलाना,,
मैं_सरल-सीधा किशोर नहीं _बहल जाऊँगा ।।

दिल मिरा इतना_ नहीं है कायर सुनो यारो,,
शोर _ तूफ़ां का सुनूँ गर जो_ दहल जाऊँगा ।।

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दिनेश एल० “जैहिंद”
09. 01. 2018

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