कविता · Reading time: 1 minute

मैं गलत नहीं था

मैं गलत नहीं था
तुमने मुझे समझा ही नहीं था
क्या कुछ किया था मैंने ऐसा
जो तुम्हे मुझसे दूर कर गया था
बताना तो था ना कम से कम
आखिर ऐसा हुआ क्या था
क्या तुमने मुझे भी
औरों की तरह समझ लिया था
देखो, मैंने कभी भी कोई साजिश नहीं की
तुम्हारे करीब आने की बस कोशिश जरूर की
तो इसमें क्या गलत था
क्या किसी ने तुम्हे मेरे ख़िलाफ़ भड़का दिया था
सिर्फ एक बार
मुझसे पूछना तो चाहिए था ना
बेवजह की दूरियाँ मुझसे बढ़ा रही थी
क्या तुम्हें मेरी आँखों मे
कभी भी कुछ भी नहीं दिखा था
इसमे सिर्फ प्यार था और वो तुम्हारे लिए था
पता नहीं किस बात का गुनाहगार
तुमने मुझे मान लिया था
आज फिर कहता हूँ तुमसे
मैं गलत नहीं था
फिर तुमने क्यों मान लिया था—अभिषेक राजहंस

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