कविता · Reading time: 1 minute

मैं खुशनसीब हूँ

मैं खुशनसीब हूँ

मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे काम आ गया
जहां भागते फिरे हैं सब , तुझसे दूर- दूर
मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे करीब आ गया
मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे काम आ गया

तेरी रजा को समझ न कोई पाया है है अभी तक
मैं हूँ की तेरे नाम पे सब कुछ लुटा दिया
मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे काम आ गया

ऐ मौला तेरा करम मुझ पर बना रहे
तेरे दीदार के लिए मैंने सबको भुला दिया
मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे काम आ गया

लोग जी रहे है इस दौलत के समंदर मे बेखौफ़
मैं हूँ कि तेरी आगोश मे समाता चला गया
मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे काम आ गया

लोग जी रहे हैं दौलत के नशे मे चूर
मैं हूँ कि तेरे नाम ने मुझे तेरा दीवाना बना दिया
मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे काम आ गया

मेरे दिल मे बस रहा है मेरे खुदा तू कुछ इस तरह
दिल के अँधेरे कोने मे एक दीपक की तरह
किस्सा मैं क्या बयाँ करूँ तेरे करम का जो मुझे पसंद आ गया
मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे काम आ गया

रोशन किया है तूने मुझे एक चमन की तरह
मेरे खुदा तूने मुझे खुद से मिला दिया
मैं खुशनसीब हूँ कि तेरे काम आ गया

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