कविता · Reading time: 1 minute

मैं कुछ कहता नहीं

तुझे देखते ही सामने आंखों के
कहीं खो जाता हूं मैं
तेरे होंठों की मुस्कान देखकर
ही खुश हो जाता हूं मैं।।

मैं कुछ कहता नहीं तुमसे
इसका मतलब ये नहीं कि
प्यार तुमसे करता नहीं हूं मैं ।।

कांटा चुभे जब तेरे पावं में
दर्द में डूब जाता हूं मैं
देखकर खुशी तेरे चेहरे पर
खिलखिला जाता हूं मैं।।

मैं कुछ कहता नहीं तुमसे
इसका मतलब ये नहीं कि
प्यार तुमसे करता नहीं हूं मैं ।।

दिख जाए तू ,इस आस में
सपनों में डूब जाता हूं मैं
मिलकर तुमसे सपनों में ही
जन्नत की सैर कर आता हूं मैं।।

मैं कुछ कहता नहीं तुमसे
इसका मतलब ये नहीं कि
प्यार तुमसे करता नहीं हूं मैं ।।

मिलोगे तुम मुझे आज तो
इस आस में जाग जाता हूं मैं
ठंडी ठंडी इन हवाओं से
खुशबू तेरी मांग आता हूं मैं।।

मैं कुछ कहता नहीं तुमसे
इसका मतलब ये नहीं कि
प्यार तुमसे करता नहीं हूं मैं ।।

समझ जाता हूं तेरी हालत
देखकर तेरे चेहरे की शिकन
तेरे हिस्से के गम मिले मुझे
अब तो यही दुआ करता हूं मैं।।

मैं कुछ कहता नहीं तुमसे
इसका मतलब ये नहीं कि
प्यार तुमसे करता नहीं हूं मैं ।।

8 Likes · 1 Comment · 231 Views
Like
You may also like:
Loading...