कविता · Reading time: 1 minute

मैं किसे गुलाब पकड़ाऊं

मैं किसे गुलाब पकड़ाऊं
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वेलेंटाइन दिवस आ गया
मैं किसे गुलाब पकड़ाऊं

जिसे जान से ज्यादा चाहा
ख्वाबों में था जिसे सजाया
दिल की बात ना कह पाया
अब की बार था ठान लिया
उसे दिल की बात बताऊँगी
वेलेंटाइन दिवस मनाऊँगी
वो सीमा पार शहीद हुआ
जिंद जान देश पर वार गया
मैं किसे गुलाब पकड़ाऊं

मैने कर ली खूब तैयारी थी
गुलाब कलम पकड़ानी थी
दिल में अरमान संजोये थे
हसीं रंगीन ख्वाब परोये थे
अचरज उपहार दिलाऊँगी
वेलेंटाइन दिलस मनाऊँगी
किसी ओर संग भाग गया
मेरा उपहार वो बखेर गया
मैं किसे गुलाब पकड़ाऊं

अजमा के हमने देख लिया
सुख-दुख को है सेक लिया
कोई किसी का है मीत नहीं
भारत की है यह रीत नहीं
देशभक्ति गीत अब गाऊँगी
मैं शहीदी दिवस मनाऊँगी
जो जिंदजान देश पे वारेगा
उसे सुमन गुलाब पकड़ाऊं

वेलेंटाइन दिवस आ गया
मैं किसे गुलाब पकड़ाऊं

सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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