Apr 11, 2021 · कविता
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मैं कठपुतली नहीं हूं

जो चाहोगे मुझे अपनी
उंगलियों पर नचाना
अच्छा नहीं है ये फ़साना
जानता है सारा ज़माना
मैं कठपुतली नहीं हूं।।

चलते है सभी राह में
अपनी ही रफ्तार से
जो चाहोगे मुझे चलाना
तुम अपनी रफ्तार से
जानता है सारा ज़माना
मैं कठपुतली नहीं हूं।।

दिल में है कोई बात
तो कह दो तुम अभी
अगर सोचते हो जब
मन करेगा कहोगे तभी
मैं ऐसा शख्स नहीं हूं
जानता है सारा ज़माना
मैं कठपुतली नहीं हूं।।

करना है मुझे अब क्या
ये भी तो जानता हूं मैं
तुमको ये नहीं मालूम
और क्या चाहता हूं मैं
जो कह दे कोई वही करूं
मैं वो शख्स नहीं हूं
जानता है सारा ज़माना
मैं कठपुतली नहीं हूं।।

वो जो चाहते है मैं वही देखूं
वो जो चाहते है मैं वही सुनूं
बड़े नादान मालूम लगते है
नहीं जानते वो मैं जनता हूं
जानता है सारा ज़माना
मैं कठपुतली नहीं हूं।।

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Surender Sharma
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