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मैं और तुम

Sajan Murarka

Sajan Murarka

कविता

January 18, 2017

मैं और तुम

मैं प्यासा सागर तट का
मैं दर्पण हूँ तेरी छाया का
मैं ज्वाला हूँ तड़पन का
मैं राही हूँ प्यार मे भटका
मैं हूँ मौन इज़हार दर्द का

तुम धड़कन मेरे दिल की
तुम चाहत मेरे सपनो की
तुम दवा मेरे ज़ख्मी-दिल की
तुम छंद हो मेरे कविता की
तुम मंजिल मेरे जीवन की

मैं और तुम प्यास बुझायें
मैं और तुम हमराही हो जायें
मैं और तुम मन को बहलायें
मैं और तुम आपस मे समाये
मैं और तुम प्रेम गीत गायें

तुम और मैं बंधे बाँहों मे
तुम और मैं धड़कन मे
तुम और मैं मग्न अपने मे
तुम और मैं प्रेम बंधन मे
तुम और मैं साथ जीने-मरने मे

सजन

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Author
Sajan Murarka
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