मुक्तक · Reading time: 1 minute

मैं एक फूल हूं।

मैं एक फूल हूं,
खूशबू बिखेरता रहता हूं।
वातावरण को सुगंधित बनाता हूं।
मैं एक फूल हूं।
गुलदस्ता बना कर भेंट करता है।
और मुझे कहीं भी फेंक दिया जाता है।
मैं फिर भी तुझे दुया देता हूं।
क्योंकि मैं एक फूल हूं।
मैं तेरी खुशी के लिए ही जीता हूं।
कितने भौंरे और पक्षी मेरे दिवाने होते हैं।
मेरे पराग कण लेने को तरसते रहते हैं।
मैं हमेशा कांटों से लड़ता रहता हूं।
मैं एक फूल हूं।
मेरा कर्तव्य मैं समझता हूं,
लेकिन तूने आज तक अपना कर्तव्य निभाया है मेरे लिए।

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