कविता · Reading time: 1 minute

मैं आम आदमी हूं

में आम आदमी हूँ (कविता)

में आम आदमी हूँ.

मुझे मेंरी अभिव्यक्तियों को बेचना

नही आता.

शब्दो के बाजार मे बिकना नहीआता.

सु:ख-दु:ख. ईर्षा-द्वेष. धर्म-कर्म.

सभई तरह का आता है अहसास.

मगर करु क्या

प्रमाणिकरण नही किसी का मेरे पास.

क्योकि में आम आदमी हूँ.

मुझ पर. नही किसी का विश्वास.

वो जिन्होने आपनी अभिव्यक्तियॉ

बेंच दी.

आज जगत मे महान हो गये.

हम सारी अभिव्यक्तियॉ समेट कर

भी कोरे कागद समान रह गये.

चतरसिंह गेहलोत
निवाली
जिला बडवानी म.प्र. 
Mob 9424540421

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