मैं आज़ाद कहलाउंगी

दुनिया दिल पर हावी है,
क्या सोचेंगे सब, क्या कहेंगे सब,
जब-तब बस यही सिलसिला जारी है
दुनिया जैसे चलाये चले जाएँ,
क्या इसी में छुपी समझदारी है?
मैं तो हूँ विद्रोही,
मैं तो हूँ फ़सादी,
दुनिया की मानने की मैं तो नहीं हूँ आदी,
मैं तो करूंगी रूढ़ियों का विरोध,
नहीं लादूँगी बरसों पुराना लबादा खुद पर,
बन तितली उड़ जाउंगी,
शायद बंधी रहूं संस्कारों से,
पर विचारों से आज़ाद मैं कहलाउंगी,
खुद के लिए नए कानून बनाउंगी,
पर मैं आज़ाद कहलाउंगी

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