मैंने मन की सुंदरता को देखा है

मैंने मन की सुंदरता को देखा है
सबसे सुंदर अपना प्रियतम लगता है

देखो मुझको प्रिय का कितना प्यार मिला
मेरा गम उसकी आँखों से बहता है

भावों का लहराता जो मन में सागर
मीत मेरा मेरे चेहरे से पढ़ता है

समझ न पाई आज तलक मैं तो इतना
जितना मितवा ने इस मन को समझा है

प्यार ‘अर्चना’ है मेरा तीरथ मंदिर
उसमे ही मुझको अपना रब दिखता है

डॉ अर्चना गुप्ता

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 629

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share