मैंने दारू चढ़ाई मज़ा आ गया

मैंने दारू चढ़ाई मज़ा आ गया
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मैंने दारू चढ़ाई मज़ा आ गया
गाँव से की लड़ाई मज़ा आ गया
एक दाना नहीं घर में खाने को था
लात बीवी से खाई मज़ा आ गया

– आकाश महेशपुरी

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