Oct 11, 2016 · कविता

मेहनत

तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे
जरा देख उन्हे भी
जो रहते है भूखे पेट बिचारे

धन्य हो तुम
जो ईश्वर ने
दो हाथ दिये कथनी करने के लिये
पथ पर चलने के लिये दो पैर दिये
तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे

ईश्वर साथ उन्ही का देता
जो खुद मे खुश रहते है
मुख मोड़ उन्ही से लेता ईश्वर
हाथ धरे जो रोते है
तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे

किस्मत के इस खेल में
क्यूं व्यर्थ समय बरबाद करो
करके देखो मेहनत
किस्मत पर तुम राज करो
तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे

इन्सान वही जो हर दुख में
हसकर आगे बड़ता है
शस्त्रविहीन होकर भी
हर पापी से लड़ता है
तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे

– सोनिका मिश्रा

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