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मेहनत

Sonika Mishra

Sonika Mishra

कविता

October 11, 2016

तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे
जरा देख उन्हे भी
जो रहते है भूखे पेट बिचारे

धन्य हो तुम
जो ईश्वर ने
दो हाथ दिये कथनी करने के लिये
पथ पर चलने के लिये दो पैर दिये
तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे

ईश्वर साथ उन्ही का देता
जो खुद मे खुश रहते है
मुख मोड़ उन्ही से लेता ईश्वर
हाथ धरे जो रोते है
तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे

किस्मत के इस खेल में
क्यूं व्यर्थ समय बरबाद करो
करके देखो मेहनत
किस्मत पर तुम राज करो
तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे

इन्सान वही जो हर दुख में
हसकर आगे बड़ता है
शस्त्रविहीन होकर भी
हर पापी से लड़ता है
तू क्यूं करता है तुलना उनसे
जो रहते है जग में बनकर न्यारे

– सोनिका मिश्रा

Author
Sonika Mishra
मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||
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