May 1, 2017 · कविता
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मेहनतकश मजदूर (मजदूर दिवस पर)

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जुझारू,मेहनतकश एक शक्ति क्रांतिकारी।
हर उद्योग में मजदूरों की अपरिहार्य भागीदारी।
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मजदूरों पर देश की समस्त आर्थिक उन्नति टिकी।
मजदूर सभी प्रकार के क्रियाकलापों की है धूरी।
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फौलादी है बाहें इनकी फौलादी हैं मुट्ठी।
नित नव निर्माण के खातिर जलते श्रम की भट्ठी।
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सर्दी-गर्मी सहते ये हर मौसम की मार।
हिम्मत और हौसले को बनाकर अपना हथियार।
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पग-पग कठिनाई और संघर्ष भरी जिंदगी।
अपने जज्बा दमखम से स्वीकारते हर चुनौती।
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दैनिक मजदूरी के आधार पर जीवन यापन करता।
कठिन परिश्रम के बदले कम मजदूरी पाता।
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खून, पसीने, मेहनत, इमानदारी की कमाई खाता।
मेहनत और मजदूरी से सदैव है इसका नाता।
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जीविका उपार्जन हेतु छोड़ा अपना घर-परिवार।
दूर शहर में जाकर करता कुछ रोजगार।
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कोई यहाँ पर बोझा ढोता कोई चलाता ठेला।
कमर तोड़कर मेहनत करता पाता नहीं एक ढेला।
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नहर,तालाब,सड़क,पुल,गगनचुंबी महलों का निर्माण।
कृषि,उद्योग,व्यापार हर क्षेत्र में योगदान।
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आज मशीनी युग में भी कम नहीं हुई इसकी महत्ता।
समस्त क्रिया कलापों में मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका।
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ये सृजनकर्ता देश की संपन्नता का प्रमुख आधार।
मजदूर के कांधे पर टिका देश का पूरा भार।
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अपना जीवन देकर करता आया देश पर उपकार।
ये कर्मयोगी सदैव प्रशंसा के हकदार।
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देश की तरक्की,प्रगति,राष्ट्र का निर्माणाधार।
देश के हित श्रम करनेववाले गवाकर अपना अधिकार।
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श्रमजीवी मजदूर ही धर्म की रक्षा के प्रत्यक्ष सहायक।
ये कर्मयोगी, मेहनती देश का सच्चा नायक।
???—लक्ष्मी सिंह ??

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is... View full profile
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