बाल कविता · Reading time: 1 minute

” मेला “

“मेला”
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मेला की देखो, तुम भी भीड़,
कोई यहां गरीब,कोई अमीर।

सब यहां हैं, पर एक समान,
लगे यहां, बहुत सारा दुकान।

लगते हैं , सर्कस और झूले;
कोई भी, ये देखना ना भूले।

मिले यहां पर खिलौना सारा,
लगता यह, बच्चों को प्यारा।

मिलती यहां बहुत ही मिठाई,
हम सबने भी ये हमेशा खाई।

अब अगर , मेला लगे कभी,
जाना तुम, सब भी जरूर ही।
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…. ✍️प्रांजल
…….कटिहार।

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