Aug 12, 2016 · कविता

मेरे सपने...!!

मेरे सपने तो मेरे अपने हैं,
सिर्फ सपने ही तो अपने हैं.
बाकी सारा तो और सभी का है!
सपने तो उपजे इच्छा से,
इच्छा उपजे अपने मन से,
मन में ही तो होते विचार सारे,
विचारों के अनुरूप ही,
मन से उभरते हैं सपने !
सपने ही हैं शिखरों की सीढ़ी,
इन सीढ़ीयों के सहारे से,
इंसान ऊचाईयों को पाता है!
सपनो को पूरा करने की
तृष्णा ही
मानव को ऊँचा उठाती है.
कुछ लोग तो
ऐसा भी कहते कि
सपने देखना नहीं सबके बश में
ऊँचा उठने की इच्छा हो
जिसमे
सपने भी वही देखता है,
ऐसे ही कुछ सपने मेरे हैं,
जिनको साकार बनाउंगी,
इन्ही सपनो के सहारे से,
कभी ऊँची उठ जाउंगी!
सिर्फ सपने ही तो अपने हैं,
मेरे सपने तो मेरे अपने हैं..!!

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