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मेरे श्रद्धेय (कविता )

Onika Setia

Onika Setia

कविता

July 20, 2017

मेरे श्रद्धेय !
मेरे आदरणीय !
तुम पर प्रेम निस्सार है।

यह अमूल्य रत्न,
यह सभी सृजन ,
इन पर तुम्हारा ही अधिकार हैें।

तुम रहो चाहे जहाँ ,
यहाँ नहीं तो वहां ,
यह ह्रदय करता सदा पुकार हैें।

तुम्हारा मृदल स्वर ,
गीत-पुष्पों से भरे अधर ,
सुख देते मुझे अपार हें।

तुम्हारे स्नेह का हाथ ,
तुम्हारे गीतों का साथ ,
यह मेरे संघर्ष का औजार हैें।

Author
Onika Setia
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , दैनिक जागरण का जागरण -जंक्शन ब्लॉग, स्वयं... Read more
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