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“मेरे मन मीत “

किरन मिश्रा

किरन मिश्रा

कविता

February 6, 2017

हाँ तुम चाँद हो मेरी रातों के !
तुम्ही ख्वाब,मेरी नींदों के !
शहद हो तुम,मेरी बातों में !
गुलाब बन महकते हो,मेरी यादों मे !
खिलते हो कमल मेरे होंठों पे !
मुस्कराते हो सूरज,मेरी आँखों में !
तुम्हारी खुशबुओं से,खिल उठती हूँ
मैं कली सी!
साथ तेरा जगमग दीवाली !
होली के रंग,जीवन में बिखरे !
शामें क्षितिज,चेहरे की लाली !
मेरी हँसी,मेरी खुशी,मेरे सुख,मेरे दुख,
मेरे साथी,मेरे सखा,
मेरे गीत जीवन संगीत,
हाँ तुम्ही तो हो,यारा,मेरे मन मीत !!””
किरण मिश्रा
5.2.2017

Author
किरन मिश्रा
"ज़िन्दगी खूबसूरत कविता है,और मैं बनना चाहती हूँ इक भावनामयी कुशल कवियत्री" जन्म तिथि - 28 मार्च शिक्षा - एम.ए. संस्कृत बी. एड, नेट क्वालीफाइड, संप्रति- आकाशवाणी उद्घघोषिका(भूतपूर्व) प्रकाशित कृति- साँझा संकलन "झाँकता चाँद"(हायकु) विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में समय-समय पर... Read more
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