कविता · Reading time: 1 minute

मेरे पेड़- पौधे ,मेरे बच्चे ( विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष)

मेरी आंखों के तारे ,
मेरे दिल के सहारे ,
मेरा सपना ,
मेरा अरमान ,
मेरा जीवन ,
मेरे प्राण ,
मेरी छोटी सी बगिया के ,
प्यारे प्यारे पेड़ -पौधों ।
तुम पर मेरा जीवन निसार ,
मेरे हृदय का सम्पूर्ण प्यार ,
तुम ना रूठा करो मुझसे ,
तुम ना मुरझाया करो ,
तुम्हारे खिलते रहने से ,
तुम्हारे महकते रहने से ,
मेरे जीवन में बहार बनी रहती है ।
तुम निष्प्राण हो जाते हो ,
तो मुझमें भी जीने की इच्छा मर जाती है ।
तुम्हारा मुरझाया मुखमंडल देखकर ,
ह्रदय में बड़ी पीड़ा होती है ।
और यदि कोई तुम्हें क्षति पहुंचाने की ,
कोशिश भी करे ,
तो तुम्हारी यह मां तुम्हारे दुश्मनों से ,
भिड़ जाती है।
प्राणों को दाव पर लगा कर भी ,
अपने बच्चों की रक्षा करती है ।
शायद मां ऐसी ही होती है।
मैं रहूं या ना रहूं ,मेरा प्यार ,मेरा आशीष
हमेशा तुम पर रहेगा ।
मेरे पेड़ -पौधों ! मेरे बच्चों !
तुम सदा सुखी रहो ,
तुम पर सदा ईश्वर की कृपा यूं ही बनी रहे ।
तुम चिरंजीव रहो ।

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