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मेरे पापा

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

June 18, 2017

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मैं आपका ही रंग रूप हूँ ,
मैं हूँ आपका आकार पापा।
मेरा जीवन है,
आप का ही आशीर्वाद पापा।
मैं जो बच्चों को देती हूँ
वो आपका ही दिया हुआ है संस्कार पापा।
कभी कहना चाही ,
पर ना कह पाई कि मेरे दिल में
आपके लिए कितना है प्यार पापा।
कभी आपका सर ना झुके
न ही कभी आपका दिल दुखे
मेरी वजह से
हर जतन किया है बार – बार पापा।
मुझे भूलना मत चाहे कुछ भी हो
दिल के किसी कोने में
छुपा कर रखना सदा ही मेरा प्यार पापा।
मैं आऊं या न आऊं
पर सदा करना मेरा इन्तजार पापा।
मेरे मन के आँगन में
मेरे जीवन में है
आपके यादो का बहार पापा ।
????- लक्ष्मी सिंह?

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Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more

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