मेरे पापा (( प्रथम भाग ))

कि नई दुनिया में वो किस्सा पुराना याद रहता है
अपने जीवन का हर गुजरा जमाना याद रहता है

भले ही पापा की दी गाली कभी सर में ना डाली
लेकिन मुश्किलों में उनका वो उंगलियों को पकड़ना याद रहता है

वो सर्दियों में पहली बार उनके साथ कहीं बाहर जाने पर पहना
चाहे जैसा भी हो वो स्वेटर पुराना याद रहता है

कि मेरी परेशानियों में सबसे पहले खड़े होना
मेरी नादानियों को नजरअंदाज कर देना
और जब कभी कदम बहक जाएं मेरे तो
उनका वो पीछे से आकर थपकी दे जाना याद रहता है

कि मेरी सफलताओं को अपनी सफ़लता मान लेना
मेरे हार जाने पर मुझे फिर से हौसला देना
और मेरे लिए सबसे खास

मेरा खर्च उठाने के लिए वो अपने सारे शौक़ भूल जाना,
याद रहता है

की नई दुनिया में वो किस्सा पुराना याद रहता है
अपने बचपन का हर गुजरा जमाना याद रहता है

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