"मेरे पापा मेरी दुनिया" #100 शब्दों की कहानी#

भूल नहीं पाती हूँ पापा मैं उन अनमोल-क्षणों को रोज नयी-सुबह के आगमन के साथ रोज जाना सैर करने और यह कहना, “अरली टू बेड़ एण्ड अरली टू राईस, मेक्स ए मैन, हेल्दी वेल्दी एण्ड वाईस” हमारे साथ ही साथ नाति-पोतो को भी । आपके सरल-स्वभावरूपी आदर्शों के बारे में शब्दों में क्या बयां करूं मैं, बस एकाग्रता से अपने कर्म करना, सदैव चेहरे पर मुस्कान कायम रखते हुए हर परिस्थिति का सामना हिम्मत के साथ करना, हम बहनों को सदा पथप्रदर्शक बन सफलता के मार्ग पर अग्रसर किया । आज पापा मेरी दुनिया बनकर यादों में समाहित हैं ।

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