मेरे देश के नौजवानों का उद्धार होना चाहिए

मजहब के साथ रोजगार पर भी विचार होना चाहिए
देश के बेरोजगार नौजवानों का उद्धार होना चाहिए

बेरोजगारी ने ही मजदूरों को दर-बदर भटकाया है
मेरे देश का असली चेहरा सामने निकल कर आया है

मजदूर जो अपने देश का अप्रत्यक्ष निर्माता है
ज़मीन पर बेसुध सोता है, सूखी रोटी खाता है

पढ़ -लिख क बेचारा नौजवान भागे नौकरी के पिछे
निराश- हताश ऊपर से मार डाले लोगों के वचन तीखे

भूखा इंसान अपराध की तरफ बढ़ता जाएगा
धर्म का अनमोल वचन भी न काम कर पायेगा

धर्म के ठेकेदार रोजगार के ठेकेदार में बदल जाते
अपराध रुपी बर्फ अपने आप खुशहाली में पिघल जाते

राम राज्य की कल्पना “नूरी”सभी करते रहते हैं
पर उपदेश का क्या ? खुद भी कभी सुधरते हैं।

नूरफातिमा खातून “नूरी”
29/5/2020
कुशीनगर

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