कविता · Reading time: 1 minute

मेरे दादा

सब लोग कहते होंगे दादा
पर मैं उनको कहता था बाबा
उनको देखकर सूरज,
रोज जगा करता था
जब होती थी रात
चांद उनसे छुपा करता था
मैं उनके साथ तो
ज्यादा समय नहीं बीता पाया
पर जीतना समय हम साथ थे
उनसे अनगिनत सीख पाया
उनके हैं छः बेटे
बड़े बड़े भी उनसे पंगा
कभी ना लेते
बाबा ने जो किया
वो हम कभी ना कर पाएंगे,
भले ही हम आसमा छू ले
पर उनको देख कर डर जायेंगे
उनको हम मानते है
भगवान से भी बढ़कर
अगर किसी में है हिम्मत
तो आकर करले,
मुकाबला डटकर
पर किसी से भी ये,
हो ना पाएगा
रात की चांदनी में,
वो खो जायेगा
बस मैं ही हूं,
जो उनकी गोद में खेला
और सदा रहूंगा,
उनका ही चेला।

मौलिक
Kn

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