मेरे घर को बाँट दिया

मेरे घर को बाँट दिया

***

मेरे घर को बाँट दिया है, धर्म के कुछ ठेकेदारो ने !
मातृभूमि से छल किया है, वतन के ही गद्दारो ने !!

नेताओ को धनाढ्य बना दिया है
बेशुमार वेतन -भत्तो के नोटों ने
राजनीति का बंटाधार किया है
लालच और नासमझी के वोटो ने
दोष किस – किस को दें यंहा पर
जब छल किया सत्ता के भुखमरों ने !

मेरे घर को बाँट दिया है, धर्म के कुछ ठेकेदारो ने !
मातृभूमि से छल किया है, वतन के ही गद्दारो ने !!

कोई लगाता चाय की दूकान
कोई खटिया पर बैठ चौपाल
जनता बन मुर्ख तमाशा देखे
गरीबो का हाल हुआ जाता बेहाल
राजनीति का ऐसा खेल रचा है
जवानों को मरवाया इन बेदर्दों ने !!

मेरे घर को बाँट दिया है, धर्म के कुछ ठेकेदारो ने !
मातृभूमि से छल किया है, वतन के ही गद्दारो ने !!

कभी कश्मीर तो कभी उत्तर प्रदेश,
कभी बिहार व बंगाल जले दंगो में
सक्षम बैठे वातानुकूलित कमरों में
बेबसों के आवास उजाड़े हुड़दंगो ने
सदियों से चली आयी यही रीत पुरानी
पीठ में खंजर घोंपे है सदा घनिष्ठ यारो ने !!

मेरे घर को बाँट दिया है, धर्म के कुछ ठेकेदारो ने !
मातृभूमि से छल किया है, वतन के ही गद्दारो ने !!

जाती धर्म का बीज बोया बैर बढ़ाने को
हवा पानी रोज़ देते तेज़ी से उपजाने को
हिन्दू-मुस्लिम जो साथ में मिल जाते
हलचल मचती सत्ता के गलियारों में
इनकी दाल रोटी का सस्ता साधन है
जिसे जमकर भुनाया है इन गदारो ने

मेरे घर को बाँट दिया है, धर्म के कुछ ठेकेदारो ने !
मातृभूमि से छल किया है, वतन के ही गद्दारो ने !!

!
!
!
डी के निवातिया

Like 2 Comment 2
Views 833

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share