कविता · Reading time: 1 minute

मेरे कान्हा जी, जब से देखी तस्वीर तेरी

तेरी एक तस्वीर , जब देखी मैने
तो मुझे जिन्दगी जीने का अंदाज आ गया
में बंदा था सीधा सादा , तेरे ख्यालों में
खोने का नया अंदाज फिर से आ गया !!

तेरा प्यार से देखना , और देख कर हसना
मेरी जिन्दगी को सरोबार सा हो गया
बुझ सा रहा था जीवन मेरा , तेरे अंदाज को
देख कर मेरा , समां खुशगवार हो गया !!

जब तक एक झलक न पा लूं, तेरी तस्वीर की
लगता ऐसा है कि नहीं खुली किस्मत तक़दीर की
खुशनुमा होती है ऐसी जिदगी जिस ने पा लिया तुमको
फिर कमी नहीं रहती है, किसी और चीज की !!

तेरी तस्वीर को दिल के उस कोने में छुपा रखा है
जहाँ न पहुंचे कोई, बस इतना बसा रखा है
झलकता रहता है मेरी पलकों का प्यार हर पल
किसी कि नजर न लगे तुझे दुनिया से दूर बसा रखा है !!

तुझ से एक पल दूर रहना मुश्किल सा हो गया है
तेरे पास आने के लिए दिल बेताब सा हो गया है
इतना प्यार जब तेरी तस्वीर से दिखाई देता है
जब पास आऊँगा तो ,सोच कर दिल खामोश हो गया है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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