Nov 8, 2017 · कविता
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मेरे आने से पहले, माँ ऐसा संसार बना देना!

हरियाली के चादर पर दादा-दादी के संग खेलूँ,
और थककर सो जाऊँ, पीपल के शीतल छाँव में,
मेरा दम न घुट जाये, माँ इतने पेड़ लगा देना !
मैं गर्भ में न मारी जाऊँ, माँ ऐसा समाज बना देना!
मेरे आने से पहले, माँ ऐसा संसार बना देना !

गीत सिखाये कोयल मुझको, और मोरनी नृत्य,
तारे और जुगनु सिखलायें, खुद को खुद से रोशन करना ,
अंधेरे से मैं डर न जाऊँ, माँ इतने दिये जला देना!
मैं पढ़ने से न रोकी जाऊँ, माँ ऐसा समाज बना देना !
मेरे आने से पहले, माँ ऐसा संसार बना देना!

उन्मुक्त फिरूँ नील गगन में, न दायरा न कोई सीमा हो ,
और मुक्त रहूँ, परम्पराओं और रुढ़ियों के बोझिल बंधन से,
बांध सके न कोई बंधन, माँ इतना सबल बना देना!
ससुराल में न जलायी जाऊँ, माँ ऐसा समाज बना देना!
मेरे आने से पहले, माँ ऐसा संसार बना देना!

प्रीति, प्रेम, सुख समृधि हो हर घर के छोटे आँगन में,
जंगल, पर्वत, गाँव, शहर मेरे सपनों की सुन्दर बगिया हो,
मैं स्वर्ग धरा पर लाऊँगी, माँ तुम सीढ़ीयाँ लगा देना!
मेरा ख्वाब न छिन जाये, माँ ऐसा समाज बना देना!
मेरे आने से पहले, माँ ऐसा संसार बना देना!

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Rupam Yadav
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