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मेरे आँसुओ की नीवँ पे तुम अपना आशियाँ न बना पाओगे

मेरे आँसुओ के नीवँ पे
तुम अपना आशियाँ
न बना पाओगे ।
ये वह सैलाब बन जायेगे
तुम्हें दूर बहा ले जाये गे
जहाँ तुम्हें सिफ॔ मेरी बातें
मेरी हँसी मेरी आँखे
चारों ओर हम ही नजर आये गे
वहाँ भी तुम अपने को
मेरी यादों से घिरा पाओगे।
मेरे खोने का अहसास
जब होगा तुम्हें
तब वह अकेलापन वह टीस
वह दद॔ झेल न पाओगे ।
सारी खुशियों होगी तुम्हारे पास
जननत की हूरे भी होगी साथ
जाम भी होगा तुम्हारे हाथ
उस वक्त तुम अपने आपको
माफ न कर पाओगे।

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mehroz anwari
mehroz anwari
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नमस्कार, मेरा नाम मैहरोज़ अनवरी है। साहित्य पिडिया से जुङकर खुशी हुई बङे बङे साहित्य...