# मेरी है मीत तन्हाई(#ताटंक)

#मेरी है मीत तन्हाई

कविता साथ चले तो मुझसे,
जाती है हार तन्हाई।
लोग बहाते हैं आँसू भी,
कह जाती मार तन्हाई।
भीड़ संग चलकर पाते हैं,
वो ख़ुशियों की सौग़ाते;
मैं कवि हूँ मुझपर ख़ुशियाँ,
देती है वार तन्हाई।

औरों को तो रंक बनाती,
पर राजा मुझे तन्हाई।
भावों में डूबा सृजन करूँ,
बजती मन में शहनाई।
निस्वार्थ भाव की सेवा है,
पर आनंद मुझे देती;
मैं कवि हूँ वरदान लगे,
मेरी ये मीत तन्हाई।

(C)आर.एस.’प्रीतम’

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प्रवक्ता हिंदी शिक्षा-एम.ए.हिंदी(कुरुक्षेत्रा विश्वविद्यालय),बी.लिब.(इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) यूजीसी नेट,हरियाणा STET पुस्तकें- काव्य-संग्रह--"आइना","अहसास और ज़िंदगी"एकल...
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