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मेरी स्वीटू

Reena Maurya

Reena Maurya

कविता

January 22, 2017

चाँदी सा मुखड़ा है
बिजली सी मुस्कान
नहीं नहीं वो मासूम नहीं है
गुड़िया बहुत करती परेशान
दिनभर करती मनमानी
थोड़ा सा खाना खाएगी
और चिल्लाए पानी- पानी
दो साल की नटखट लाड़ो
जब हो जाए गुस्सा
मुँह फुला गोलगप्पे जैसे
मारेगी मुक्का – मुक्का
कान पकड़कर अपने मैं
जब खूब करूँ चिरौरी
प्यारी स्वीटू गुस्सा मत हो
आ खेले आँख – मिचौली
खूब कराए जतन मुझसे
मनवाए अपनी बातें सारी
मोबाइल रख जरा सा मैं
हो जाऊँ यहाँ – वहाँ
लाइक – अन लाइक
कमेंट – समेंट
हो जाते सारे जहाँ – तहाँ
करती घरभर खूब उधम
नहीं किसी की सुनती है
मुझे सताने की गुड़िया ने
जैसे खाई हो कोई कसम
बहुत प्यार है उसको मुझसे
मम्मा- मम्मी कहती है
मेरे जीवन का हिस्सा है वो
सदा मेरे ह्रदय में बसती है

Author
Reena Maurya
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