वो है मेरी माँ

( वो है मेरी माँ)

मुसीबत के समंदर में जो किनारा दिला दे वो है मेरी माँ ।
जीने के मायने मुझको है जिसने सिखाये वो हैं मेरी माँ ।
औलाद उदास हो तो चेहरे पर मुस्कान ला दे वो हैं मेरी माँ ।
लबों पे जिसके कभी बद्दुआ नही आती वो हैं मेरी माँ।
सौंधी मधुर हवाओं की जैसी चलने वाली वो है मेरी माँ।
रुक जाए तो चाँद के जैसी शीतल लगती हैं वो है मेरी माँ।
जिसमें नजर आता है मुझे जन्नत का नजारा वो है मेरी माँ ।
रंग बिरंगी छवि में फुलवारी सी महकाने वाली वो है मेरी माँ ।
प्रेम रूपीसागर में ओस की बूँद सी बरसाने वाली वो है मेरी माँ।
रिश्तों में अटूट कड़ियाँ जोङके खुशियाँ लाने वाली वो है मेरी माँ।
परिवार की बगिया को बहार से महकाने वाली वो है मेरी माँ।
मन में अटूट ज्योति सा विश्वास जगाने वाली वो है मेरी माँ।
मोहित छवि में पवित्र धारा सा प्रेम दिखाने वाली वो है मेरी माँ।
तम को हटाके जो साया बनकर साथ निभाती है वो है मेरी माँ ।
अ खुदा कभी दर्द न देना माँ जैसी हस्ती को,
जिसने जमीं पर ही बनाया है स्वर्ग जैसी कश्ती को।

युवा कवयित्री
शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ़) राजस्थान

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