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मेरी माँ

माँ के आँचल की
छाँव घनेरी
बनी रही वो
हरदम प्रहरी
भरी धूप में
ठहरी ठहरी
माँ की बातें प्यार भरी

खिड़की दरवाजे
और बिछौना
मेरे घर का
हर इक कोना
बूंद बूंद में
जीवन रचती
घर आंगन की
थी वो ही धुरी
माँ की बातें प्यार भरी

जब जब बिखरी मैं
सम्बल थी वो
अश्रु से भी
पावन थी वो
बादल बन
वो रही बरसती
बिछती बन मखमल
घास हरी
माँ की बातें प्यार भरी।

कोकिला अग्रवाल ( मेरठ- यू पी )

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Kokila Agarwal
Kokila Agarwal
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House wife, M. A , B. Ed., Fond of Reading & Writing
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