कविता · Reading time: 1 minute

मेरी माँ मेरी कविता

काश कहीं खामोशी कि भी दुकान होती….
ओर मुझे उसकी पहचान होती…..
खरीद लेता में वो खुशियाँ आपके नाम,
चाहे उसकी कीमत मेरी जान क्यों न होती….
गुम हो जाते हैं,
अपने सब,फिर फिर झुठ बोलकर छोड़ देते हैं……
हाथ हमारा, क्या रखा हैं……
जीने में, न आज न कल बस बेबसी हैं……
सीने में,आज भी जन्नत हैं……
यहीं इसी जगह माँ तेरी गोद में!!

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