Jan 19, 2017 · कविता

मेरी बेटी

कभी ठुमक ठुमक, कभी मटक मटक

वो सारे घर में चलती है

कभी माँ, कभी मम्मा, कभी मम्मी जी

मुझको हर वक़्त बुलाती रहती है ||

मेरी नन्ही सी परी, मेरी प्यारी परी

मुझको बहुत प्यार करती है

गलती हो जाए गर उस से तो

थोडा तो, मुझसे डरती है ||

डांट पड़ती है जब उसको मुझसे

तो गंगा जमुना उसकी आँखों से बहती है

रोती रहती है तब बस वो

बोल कर कुछ न कहती है ||

सांस ऊपर की ऊपर नीचे की नीचे

उसकी अटकी रहती है

चैन नहीं तब तक पड़ता उसको

जब तक लाड (प्यार ) न मुझसे कर लेती है

फिर धीरे – धीरे , वो होले – होले

मेरी गोदी में सिमटती जाती है

फिर सकूं मिलने के बाद

पहले सी चंचल हो जाती है ||

वो चंचल परी ,वो नटखट बड़ी

मेरी बेटी , मेरी प्यारी सी गुडिया है

सदा आशीष रहे भगवान् की उसपर

बस यही , मेरी दुआ है

हरदम यही मेरी दुआ है ……

Amita Gupta Magotra
Maulik rachna

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