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मेरी बेटी

Amita Magotra

Amita Magotra

कविता

January 19, 2017

कभी ठुमक ठुमक, कभी मटक मटक

वो सारे घर में चलती है

कभी माँ, कभी मम्मा, कभी मम्मी जी

मुझको हर वक़्त बुलाती रहती है ||

मेरी नन्ही सी परी, मेरी प्यारी परी

मुझको बहुत प्यार करती है

गलती हो जाए गर उस से तो

थोडा तो, मुझसे डरती है ||

डांट पड़ती है जब उसको मुझसे

तो गंगा जमुना उसकी आँखों से बहती है

रोती रहती है तब बस वो

बोल कर कुछ न कहती है ||

सांस ऊपर की ऊपर नीचे की नीचे

उसकी अटकी रहती है

चैन नहीं तब तक पड़ता उसको

जब तक लाड (प्यार ) न मुझसे कर लेती है

फिर धीरे – धीरे , वो होले – होले

मेरी गोदी में सिमटती जाती है

फिर सकूं मिलने के बाद

पहले सी चंचल हो जाती है ||

वो चंचल परी ,वो नटखट बड़ी

मेरी बेटी , मेरी प्यारी सी गुडिया है

सदा आशीष रहे भगवान् की उसपर

बस यही , मेरी दुआ है

हरदम यही मेरी दुआ है ……

Amita Gupta Magotra
Maulik rachna

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Author
Amita Magotra

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