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मेरी बिटिया

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 1, 2017

तू प्रातः की सुन्दर किरण।

‌तू बगिया की चंचल बयार।

तू चिड़िया की मधुर गूंज।

‌तू संगीत की मीठी सरगम।

तू वर्षा की शीतल बूंद।

‌तू चंदा का शांत प्रकाश।

तू झरनों का मधुर स्वर।

‌तू फूलों की भीनी गंध।

तू माटी की मधुर महक।

‌तू गंगा का पावन जल।

तू मंदिर की मधुरिम घंटी।

‌तू ईश्वर की सच्ची प्रार्थना।

तुझ में वो सब जिसकी मुझे ललक।

‌ चाहूं तुझे निहारूं अपलक।

तुझको मांगा है ईश्वर से।

‌उसने झोली भर दी मेरी।

चमका घर का कोना कोना।

‌जब से कदम पड़े हैं तेरे।

बूझ सको तो बूझो कोई।

‌कौन है यह प्यारी सी हस्ती?

यह तो प्यारी बिटिया मेरी।

‌यह तो प्यारी बुलबुल मेरी।

—-रंजना माथुर दिनांक 28/04/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
copyright

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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