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मेरी नन्ही परी

नन्ही सी प्यारी सी हमारी परी,
हम सब की है वाे राज दुलारी,
जब छमछम गूंजे उसकी पायल,
सुनकर सब हाे जाते उसके कायल,
काेयल सी प्यारी उसकी मीठी बाेली,
हाेते खुश देखकर उसकी सूरत भाेली,
नन्हे नन्हे हाथाे से जब करती वाे काम,
लगता है घर पर ही है चाराे धाम,
उसकाे देखकर मिट जाता मेरा सारा गम,
घर उजाले से भर जाता मिटता सारा तम,
थाेड़ी नटखट थाेड़ी है वाे चंचल,
घर में जब आती हाे जाती है हलचल,
लड़ना झगडना रुठना और मनाना,
यह सब है गहने उसके इनका क्या कहना,
दादा दादी नाना नानी की वह प्यारी,
वह ताे है हम सब की गुड़िया न्यारी,

।।।जेपीएल।।।

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जगदीश लववंशी
जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना...
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