मेरी तरह उदास थे कल रात आप भी

मेरी तरह उदास थे कल रात आप भी
रखते हो क्यूँ छिपा के ये जज़्बात आप भी

करते रहे हो रोज़ मुलाक़ात आप भी
पढ़ते रहे हो दिल के ये हालात आप भी

कैसे कहें के प्यास है जब आप साथ हैं
सावन भी बारिशें भी हैं बरसात आप भी

रक्खे हैं हमने आपके वादे संभालकर
लाए हो कुछ बहानों की सौग़ात आप भी

अश्क़ों की जंग आँख से बेहद अजीब है
आँखों को दे रहे हो ये आफ़ात आप भी

झूटे तमाम लोग इकट्ठे थे इक जगह
क्या जानते न इनकी हो औक़ात आप भी

अच्छी-भली हैं बात कई ले के आए हम
लाए हो फ़ायदे के ख़यालात आप भी

कल ही सुना था आप हैं दानी कोई बड़े
क्यूँ आज ले रहे हो ये ख़ैरात आप भी

आनन्द लाजवाब है आनन्द बेज़ुबाँ
ख़ुद आप ही जवाब सवालात आप भी

– डॉ आनन्द किशोर

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