.
Skip to content

मेरी जेब में….. (लघु कथा)

हरीश लोहुमी

हरीश लोहुमी

लघु कथा

July 28, 2016

मेरी जेब में…..
*********************************************
बचपन में शम्भू चाचा का बेटा दीपू , मेरा अजीज दोस्त था । एक दिन मैं दीपू को ढूंढते-ढूंढते उसके घर पहुँचा ही था कि शम्भू चाचा दिखाई पड़ गए । मैंने शम्भू चाचा से पूछा- चाचा जी ! दीपू कहाँ है ?
शम्भू चाचा शायद किसी जरूरी काम में व्यस्त थे उन्होने मात्र हाथ के इशारे से ही बताया कि उन्हें नहीं पता । मैं भी कहाँ मानने वाला था मैंने दुबारा कुछ ज्यादा ही ऊँची आवाज में पूछ लिया – दीपू कहाँ है चाचा जी !

शायद दीपू के बारे में मेरे दुबारा पूछने से उनके कार्य में कुछ व्यवधान हुआ हो, उन्होने मुझसे भी ऊंची आवाज में भौहें चढ़ाकर कहा- “मेरी जेब में !”

मेरे जिस मुँह ऊंची आवाज निकली थी, उस पर अब उतना ही बड़ा ताला लटक गया था । अब मेरे पास पूछने के लिए कुछ भी नहीं बचा था ।

*********************************************
हरीश लोहुमी , लखनऊ (उ॰प्र॰)
*********************************************

Author
हरीश लोहुमी
कविता क्या होती है, नहीं जानता हूँ । कुछ लिखने की चेष्टा करता हूँ तो फँसता ही चला जाता हूँ । फिर सोचता हूँ - "शायद यही कविता हो जो मुझे रास न आ रही हो" . कुछ सामान्य होने... Read more
Recommended Posts
हमें क्या?
अलसाई आखों से आसमान को निहारते हुये छत की मुंडेर पर बैठे- बैठे बस एक ही बात सोचे जा रहा था; आखिर कब अंत होगा... Read more
मैंने किसी को कहते सुना है,,,,,,
मैंने किसी को कहते सुना है । कि , गम में डूबा ये सारा जहाँ है । मैं हूँ गम में , मौसम भी गम... Read more
हूं मैं कहां...
मैं रहती हूं, पर हूं कहाँ। मैं सहती हूँ, पर हूं कहाँ। मैं डरती हूं, पर हूं कहाँ। मैं मरती हूं, पर हूं कहाँ। मैं... Read more
मोबाइल बुरा नहीं होता
लघु कथा                   "मोबाईल बुरा नहीं होता" मैं अपने सोसाइटी का सबसे कम पढ़नेवाला लड़का था इसलिए,क्योंकि मैं अपने सोसाइटी में लोगो के नजर में... Read more