मेरी गौरैया

मेरी गौरैया बच कर रहियो
यहाँ दरिन्दे आम हैं
ना उनके बेटी ना उनकी बहना
उनका संगी ‘काम’ है ।

पहन मुखौटे तरह तरह के
सब को यह भरमाये हैं
मानवी रिश्तों का मोल नहीं
राक्षसों के यहाँ जाए हैं ।

मानसिकता है गिरी हुई
चेतना शुन्य लोग यहाँ
इनसे बचके रहना गौरैया
नोचने को तत्पर यहाँ ।

इन गिद्दों से बच कर रहना
आकाश में मंडराते हैं
जहाँ देखी इकली गौरैया
झपटा मार ले जाते हैं ।

छतरी के नीचे कब तक रखूँ मैं
आखिर बाहर निकलना है
लड़ना मरना सीख ले गौरैया
अब तो यही तेरा गहना है ।

निर्भया संस्कृति दिव्या
गीता हो या आसिफा
कब तक भोग्या बन रहेंगी
भारत की ऐसी बेटियां
पंजों को तू पैने कर ले
पंखों को तू डैने कर ले
समाज नपुंसक तब भी अब भी
कुत्तों का तू पौरुष हर ले ।

एक गौरैया निर्भया भी थी
जागृत कर, जो विलीन हो गई
मशाल बन तुम, जलते रहना
जो अपना अस्तित्व बचाना है ।

मेरी गौरैया बच कर रहियो
यहाँ दरिन्दे आम हैं
ना उनके बेटी ना उनकी बहना
उनका संगी ‘काम’ है । ।
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सर्वधिकार सुरक्षित /त्रिभवन कौल

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