कविता · Reading time: 1 minute

मेरी गीत गजलों में मेरी शकन देखिये

मेरे गीत गज़लों में मेरी इतनी तो शान देखिये
रोता हूँ भारत माँ के लिये मुझे परेशान देखिये

अब नहीं आती कभी सपनों में किसी के माता
टुकडों में बंटा है कलेजा हिन्दू मुसलमान देखिये

बेकदरी से पड़ी रहती है घर पर बेटियों की तरह
समझते नहीं जिसको कभी, गीता कुरान देखिये

सोचता हूँ अलख जगा दूँगा एक दिन दिलों में
देशभक्ति में पर मुझे अभी बच्चा नादान देखिये

हम रखतें है अपनी भुजाओं में दम सिँह जैसा
होंगे देश पर हम भी एक दिन कुरबान देखिये

अगर हमदर्दी है दिलों में आज भी जाग जाओ
वरना टुकडों में बंट जाएगा ये हिंदुस्तान देखिए

जिसने बनाया अखण्ड भारत चलो उसके निशाँ
अब नहीं आएगा कोई भी अशोक महान देखिये

बेटियाँ लक्ष्मीबाई और बेटे को छत्रपति बना डालो
फिर अपने भारत पर मिटने वालो की आन देखिये

अशोक सपड़ा हमदर्द

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