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मेरी ग़ज़ल के दो शेर

Shri Bhagwan Bawwa

Shri Bhagwan Bawwa

गज़ल/गीतिका

July 10, 2017

तेरे शहर में रिश्तो का कोई सम्मान नहीं होता ,
मेरे गांव की तरह मेहमान, भगवान नहीं होता ।।
अपने हाथों से लिखते हैं तकदीर- ऐ -इबारत,
हम गरीबों की किस्मत में, वरदान नहीं होता ।।

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