कविता · Reading time: 1 minute

मेरी कविता मेरी माँ

माँ तेरे हर लफ्ज़ महफ़िल पर में हूँ…..
माँ तेरे हर दिल के दर्द में में हूँ…..
माँ तू रेत के जैसी रेतीली सी,
में हवा के जैसे हवाई सा,
माँ तू चाँद के जैसे चाँदनी सी,
में तारों के जैसे तारा सा,
माँ तेरे लफ्ज़ कि पहचान हूँ…..
माँ तेरे अल्फाज़ का अरमान हूँ……
माँ तू मिठाई के जैसे मीठी मीठी सी,
में इमली के जैसे खट्टा खट्टा सा,
माँ तू आवाज़ के जैसे दरिया सी,
में समंदर के जैसे खारा सा,
माँ तू फलों के जैसी नाज़ुक सी,
में पंखुड़ियों के जैसे पंख फैला हुआ सा,

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