कविता · Reading time: 1 minute

मेरी कविता मेरी माँ

गुम हो जाते हैं अपने सब,फिर फिर झुठ बोलकर छोड़ देते हैं हाथ हमारा, क्या रखा हैं,जीने में, न आज न कल बस बेबसी हैं,सीने में,आज भी जन्नत हैं,यहीं इसी जगह माँ तेरी गोद में!!

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