मेरी कलम से .....

१.उसका दिल, दिल नहीं, रेत का मैदान निकला।
कई बार लिखा नाम अपना,हर बार मिटा देती हैं॥

२.मुझें तैरना नहीं आता और उसे डूबना…।
मोहब्बत में इरादो का, मगर मिलना जरुरी है॥

३.बहुत गुमान था उसे अपने पत्थर दिल होने का।
मैं उसी पत्थर पर अपना नाम लिख आया हूँ॥

४.तुझें जहाँ जाना है, चली जा… तेरी मर्जी।
मगर लौट कर, जिन्दगी में तुझें जगह दूँगा, मुझसे उम्मीद मत करना॥

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