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मेरी उम्मीद से खिलवाड़ न कर

मेरी उम्मीद से खिलवाड़ न कर
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मेरी उम्मीद से खिलवाड़ न कर,
मेरी तन्हाइयों पे कभी वार न कर,
मन की बेचैनियों पे,तू कभी इतवार न कर।
बड़े ही प्यार से सींचा है हमने,
तेरी हर ख्वाहिशों को पाला है हमने,
जग की रुसवाईयों को झेला है हमनें,
फिर क्युँ इस हाल पे छोड़ा है तुमने।

उम्र जब ढल जाए तो सहारा न देना,
कोई तकलीफ न होगी मुझको,
तेरी हर खुशी से ही, मेरा शकुन तो होगी।
पर तुम यदि तकलीफ में रहते तो ,
मेरी जिंदगी में सुख-चैन कहाँ से होगी,
और मेरी आँखों में कभी नींद न होगी।
पल भर जो इस बात का,तुम ख्याल तो कर।
मेरी उम्मीद से खिलवाड़ न कर ।

मौलिक एवं स्वरचित
सर्वाधिकार सुरक्षित
© ® मनोज कुमार कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि -१८ /०९/२०२१
मोबाइल न. – 8757227201

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मनोज कुमार "कर्ण" "क्यों नहीं मैं जान पाया,काल की मंथर गति ? क्यों नहीं मैं समझ पाया,साकार की अंतर्वृत्ति ? मोह अब कर लो किनारा,जिंदगी अब गायेगी । सत्य खातिर…
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