कविता · Reading time: 1 minute

मेरी अभिलाषा

तात अब मैं भी स्कूल जाऊंगा
छोड़ के अपनी माँ की गोद, स्कूल में दौड़ लगाउँगा,

माँ ने मुझको आधार दिया, तुमने मुझको अभिमान दिया
इन सबको ही पाकर अब, शिक्षा को मैं अपनाऊंगा,

तात अब मैं भी स्कूल जाऊंगा

जीवन के हर एक रंगों से, खुद की तस्वीर सजाऊंगा,
रंग, जाति और धर्म, द्वेष इनको न खुद में समाऊंगा

है एक छोटी सी अभिलाषा, लिख लूँ खुद की एक परिभाषा ।

।। आकाशवाणी ।।

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कार्यरत - शिक्षक शिक्षा विभाग (सन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टीचर्स एजुकेशन शाहजहांपुर)
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